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अफारा रोग की चपेट में आ रहे पशु, जाने कारण – करें बचाव

सूखा भूसा, नया चारा खिलाना है इसका कारण

   जौनपुर  भयंकर गर्मी की तपिश से पशुओं के चारे पर भी संकट खड़ा होने लगा है। पशु पालकों द्वारा सूखा भूसा व नया चारा खिलाने से पशुओं को गोबर के बंद, अफारा की शिकायत तेजी के साथ बढ़ने लगी हैं। हर रोज जिले के पशु अस्पतालों में बड़ी संख्या में पशु इस रोग की चपेट में आकर पहुंच रहे हैं।

इन दिनों गर्मी पड़ रही है। अधिकतम पारा कभी 38 तो कभी 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच रहा है। ऐसे में पशु-पक्षियों के साथ मानव भी पूरी तरह से उसकी तपिश में झुलस रहा है। पशुओं के शरीर में पानी की कमी पाई जा रही है। ऐसे में पशु पालक अपने पशुओं को सूखा, भूसा व नए चारे की सानी करके खिला रहे हैं। पानी की कमी होने के कारण वह पेट में जाकर पशुओं के आंतों से चिपक रहा है। इस कारण पशुओं में गोबर बंद की बीमारी फैल रही है। पशुओं की हालत भी बिगड़ रही है। खास बात यह है कि पशुओं को गर्मी के हिसाब से भरपूर पानी नहीं मिलने से उनके शरीर में पानी की कमी हो रही है। इस कारण भूसा व चारा पेट में ही चिपक रहा है।
पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. चंद्रभानु  ने बताया कि बीमारी से बचाव के लिए पशुपालकों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

       बचाव के लिए पशुपालकों को एडवाइजरी भी जारी की जा रही है।

— गर्मी में करें पशुओं की ऐसे देखभाल
– कुछ दिनों तक नए व पुराने चारे को मिलाकर खिलाने की आदत डालें।
– भूसे को सानी करने से पहले लगभग तीन घंटे तक पानी में भिगाए रखें।

– फिर भीगे हुए भसे से- पानी को निकाल कर दूसरे   साफ पानी में उनकी सानी चलाएं
– पशु गर्मी की चपेट में न आएं, इनके लिए दिन में चार – पांच बार नहलाएं।
– तीन-चार घंटे से ज्यादा समय तक पशुओं को धूप में न छोड़ें।
– रात में पशुओं के आसपास मच्छरों से छुटकारे के लिए धुंआ करें।

– इसलिए होती है समस्या
गर्मियों में पशुओं के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में पशु पालकों द्वारा नया चारा व सूखा भूसा खिलाने से वह आंतों से चिपक जाता है। इस कारण गोबर बंद की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

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Author: fastblitz24

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