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दवा और सौंदर्य प्रसाधन पर “हलाल” हुआ हराम

प्रदेश सरकार ने लगाई हलाल प्रमाणित लेवल लगाने पर रोक, ड्रग एक्ट के अनुसार होगी कार्यवाही

जौनपुर । प्रदेश में धर्म विशेष की भोजन पद्धति पर आधारित प्रमाणीकरण की व्यवस्था “हलाल सर्टिफिकेशन” एक बार फिर चर्चा में है। प्रदेश सरकार द्वारा दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों के लेबल और पैकिंग पर धार्मिक संस्था द्वारा जारी किए जा रहे अनुमति विवरण और निशान अंकित किए जाने को अवैध बताते हुए उसे पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन को आदेश दिया है कि ऐसे उत्पादों की बिक्री रोकी जाए और उन पर ड्रग एक्ट के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

 क्या है हलाल सर्टिफिकेशन?

हलाल” मुस्लिम धर्म के अनुसार पशु वध की व्यवस्था और तरीका है। उनकी मान्यता है कि निर्धारित विधि से वध किए गए पशु का मानसी खाया जाना चाहिए। इसीलिए लिए मुस्लिम हलाल प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करते हैं. सर्टिफाइड होने का मतलब है कि मुस्लिम समुदाय के लोग ऐसे प्रोडक्ट्स को बिना किसी संकोच खा सकते हैं। 

भारत में पहली बार 1974 में हलाल सर्टिफिकेशन की शुरुआत हुई. देश में हलाल सर्टिफिकेशन के लिए कोई सरकारी संस्था नहीं है. कई प्राइवेट कंपनियां और संस्थाएं ऐसे सर्टिफिकेशन को जारी करती हैं. आरोप है कि हलाल मार्केट को बढ़ाने के लिए कुछ संस्थाएं ऐसे प्रोडक्ट्स पर भी ये सर्टिफिकेशन दे रही हैं, जिनका इस विधि से कोई मतलब नहीं है और जिन्हें तमाम लोग रोजाना इस्तेमाल करते हैं।

अब औषधि विभाग द्वारा ऐसे  

उत्पादों बिक्री रोकने और स्टॉक मिलने पर ड्रग एक्ट 1940 के अंतर्गत कार्यवाही करेगा । अपर मुख्य सचिव अनीता सिंह ने इस संबंध में आयुक्त उत्तर प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन को आदेश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे उत्पादों की बिक्री औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा-18 के अंतर्गत प्रतिबंधित है तथा धारा-27 के अंतर्गत दंडनीय है।

प्रदेश प्रशासन द्वारा जारी यह आदेश अंग्रेजी, आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक दवा के साथ साथ सौंदर्य प्रसाधन पर भी लागू होगा।

दवा संगठन ने किया स्वागत, कार्यवाही के लिए मांगी मोहलत

आदेश का स्वागत करते हुए जनपद के अग्रणी दवा व्यवसायी संगठन केमिस्ट एंड कॉस्मेटिक वेलफेयर एसोसिएशन ने कार्यवाही शुरू करने के पहले दवा व्यवसाईयों को समय देने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष महेन्द्र गुप्ता ने बताया की संगठन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की है कि इस मामले में दवा व्यवसाईयों की सीधे तौर पर कोई जिम्मेदारी नहीं बनती और उन्हें अपने स्टॉक को कंपनी वापस किए जाने के लिए कम से कम 15 दिनों का समय दिया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार द्वारा आदेश जारी किया जाना चाहिए जिससे छोटे व्यापारियों को उत्पीड़न से बचाए जा सके साथ ही इस आदेश का प्रचार प्रसार भी किया जाना चाहिए।

संगठन ने जनपद की सभी दवा व्यवसाइयों को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि उन्हें अपनी स्टाक को भली प्रकार चेक कर लेना चाहिए और जिन दवाओं की लेवल पर हलाल सर्टिफिकेट दिए जाने की सूचना अंकित है उसे तत्काल अपने डीलर या निर्माता को वापस कर देना चाहिए। अगर किसी भी दवा व्यवसायी को इस संबंध में कोई जानकारी लेनी है, या विभाग द्वारा कोई कार्रवाई की जा रही है तो संगठन को तत्काल सूचित करना चाहिए।

आज तमाम खाद्य पदार्थ उत्पादकों द्वारा हलाल सर्टिफिकेशन प्राप्त कर धर्म विशेष के उपभोक्ताओं में अपनी पैठ बनाने की होड़ लगी हुई है, और इसमें यूनानी आयुर्वेदिक एलोपैथिक दवा उत्पादक कंपनियां भी शामिल हो गई हैं। उस समय उत्तर प्रदेश सरकार का यह आदेश इस अंधी दौड़ को रोकने में कितना कामयाब होगा यह तो समय बताएगा।

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Author: fastblitz24

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