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कथा के समापन पर विशाल भंडारे का किया गया आयोजन

विकास खंड मछलीशहर के गांव बामी में सप्ताह भर से चल रहे शिव महापुराण कथा के सातवें और अंतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें जनपद और गैर जनपदों से आये भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

इससे पूर्व आखिरी दिन काशी धर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने आध्यात्मिक लाभ के लिए आये भक्तों को आध्यात्मिक लाभ प्रदान करते हुए कहा कि हमारा जीवन भोग पूरक न होकर त्याग पूरक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे आहार और विचार का हमारे जीवन पर असर पड़ता है।तामसी आहार से तामसी प्रवृत्तियां प्रबल होती चली जाती है। उन्होंने मांसाहार और धूम्रपान को छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य की मृत्यु होने पर उसे श्मसान और कब्रिस्तान में ले जाते हैं। अगर हम गम्भीरता से विचार करें तो जो मांसाहार करने वाले मनुष्यों का शरीर भी चलते फिरते श्मशान और कब्रिस्तान के समान ही है क्योंकि जिन जीवों को हम खाते हैं उन्हें भी मारकर ही खाते हैं।मरे हुए जीवों का उपभोग कर उन मरे हुए जीवों के संस्कार से हमारी शरीर और प्रवृत्तियां प्रभावित हो रही हैं। शराब चाहे गेहूं, अंगूर, गन्ने के रस से बन रहा है सब के सब सड़ाकर ही बनाये जाते हैं। धूम्रपान से समाज में नाना प्रकार के अपराध पैदा हो रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर गुरुदेव जी आरती कर विदाई की गई उन्हें जाते देख भक्तों की आंखे नम हो गई।

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Author: fastblitz24

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