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सावधान! पड़ोसी राज्य बिहार तक पहुंचा निपाह, कोरोना से भी है ज्यादा घातक

लखनऊ। निपाह वायरस का खतरा पड़ोसी राज बिहार तक पहुंच गया है। देश में सामने आए निपाह संक्रमितों की जीनोम सीक्वेंसिंग में पता चला है कि वायरस का स्ट्रेन बांग्लादेश व मलयेशिया में फैलने वाले स्ट्रेन जैसा ही है। केरल में निपाह संक्रमण से दो लोगों की मौत के बाद सभी राज्यों को अलर्ट पर रखा गया है। हालांकि, भारतीय वैज्ञानिक अलर्ट से ज्यादा सरकारों से जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। इनका मानना है कि देश में चमगादड़ों से इन्सानों में निपाह वायरस पहुंच रहा है।

 

भारत में निपाह संक्रमण पर अब तक छह से सात अध्ययन कर चुकीं पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा यादव बताती हैं कि कोरोना की तुलना में निपाह वायरस काफी जानलेवा है।

अब तक 10 राज्यों में इस वायरस की मौजूदगी का पता चल चुका है, बावजूद इसके एक या दो राज्य को छोड़ बाकी कोई भी निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर काम नहीं कर रहा है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में निपाह का पहला मामला 2001 में पश्चिम बंगाल में मिला। इसी राज्य में 2007 को दूसरी बार इसके रोगी मिले, लेकिन इसके बाद तीसरी बार 2018 में केरल में निपाह के मामले सामने आए, जिनमें 16 लोगों की मौत हुई। तब से लेकर अब तक केरल में ही चार बार निपाह संक्रमण फैला है, जिसने 19 लोगों की जान ली है। हालांकि, केरल के अलावा तमिलनाडु, गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और पुदुचेरी में संक्रमित चमगादड़ पाए गए हैं।

निपाह वायरस के प्रभाव 

यह सबसे पहले मनुष्य की मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है इससे पहले तो तेज सर दर्द होता है फिर अगर किसी को सही समय पर इलाज नहीं मिले तो वे 24 से 48 घंटों के बीच में कोमा में भी जा सकता है। इस वायरस के संपर्क में आने से तेज बुखार होती है और साथ ही पूरा शरीर दर्द करता है। इस वायरस के संपर्क में आने से जल्दी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है अगर उसे सही समय पर मेडिकल हेल्प नहीं मिली तो। 

निपाह वायरस से बचाव के उपाय 

डॉक्टर के सुझाव के अनुसार मुख्यतः यह बीमारी चमगादड़ों द्वारा फैलाई जाती है इसलिए जब भी कोई चमगादड़ों द्वारा गए बलिया सब्जियों का सेवन कर लेता है तो वह इस वायरस का शिकार हो जाता है. इसलिए एहतियात के तौर पर जमीन पर पड़े हुए फल या सब्जी नहीं खाएं। जो व्यक्ति से संक्रमित है उसके पास न जाए क्योंकि यह वायरस संक्रमित व्यक्तियों की संपर्क में आने से भी फैलता है। 

यह वायरस सूअरों में भी पाया जाता है तो सूअरों से भी दूरी बनाकर रखें। फल व सब्जियां खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह से धो लें। अगर आप कहीं बाहर घूम कर आ रहे हैं तो अच्छे से अपने हाथ, पांव और मुंह है साबुन से धो लें। 

अगर कोई व्यक्ति इससे संक्रमित हो जाता है तो उसे रिबावायरिन नामक दवाई दी जानी चाहिए और उसकी ठीक तरह से देखभाल करनी चाहिए. इस दवाई का असर मनुष्य पर कितना कारगर है अभी तक यह पता नहीं लगाया जा सका है।

मनुष्य और जानवरों के लिए इस वायरस से बचने के लिए अभी तक कोई टीका नहीं बनाया गया इसलिए सावधानी पूर्वक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। जिन क्षेत्रों में यह वायरस फैल चुका है वहां जाने से बचें.

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Author: fastblitz24

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