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प्रोफेसर राम हर्ष सिंह का निधन, आयुर्वेद जगत में शोक की लहर   

प्रोफेसर राम हर्ष सिंह नहीं रहें। वैकल्पिक चिकित्सा की आयुर्वेद प्रणाली के एक भारतीय चिकित्सक,डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक एमेरिटस प्रोफेसर और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के एक राष्ट्रीय प्रोफेसर , जिन्हें  2016 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया था, ने आज इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 

हालांकि वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।
उनके निधन से आयुर्वेदिक चिकित्सा जगत में जो रितिका आई है वह अपूरणीय है

लोकेश्वर सिंह का जन्म 10 जनवरी 1942 को  उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के कनियारी पुर गाँव में हुआ था और उन्होंने 1961 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से आयुर्वेद चिकित्सा और सर्जरी (एबीएमएस) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने एक संकाय सदस्य के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने अपनी मातृ संस्था, बी.एच.यू. में विभिन्न पदों पर कार्य किया। डॉक्टरेट डिग्री (पीएचडी) के लिए उनके मार्गदर्शक डा केएन उडुपा थे , जो एकीकृत चिकित्सा के प्रणेता और चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक निदेशक थे । सन 2003 में, जब जोधपुर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।, उन्हें इसके संस्थापक कुलपति के रूप में नियुक्त किया गया था।  और 2006 तक इस पद पर कार्यरत रहे।वह अमेरिका के माउंट मैडोना इंस्टीट्यूट के आयुर्वेद कॉलेज में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी कार्यरत रहे।

प्रोफेसर सिंह एसोसिएशन ऑफ आयुर्वेदिक फिजिशियन ऑफ इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष और आयुष मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज के वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे । वह भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के विज्ञान के इतिहास पर राष्ट्रीय आयोग के सदस्य भी रहे थे । आयुर्वेद पर उनके शोध को 200 से अधिक शोध पत्रों और 15 पाठ्य पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित किया गया है।
उन्हें 2007 में महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एमजीआईएमएस) द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था , उसी वर्ष उन्हें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का एमेरिटस प्रोफेसर बनाया गया था। वह नेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन मेडिसिन के निर्वाचित फेलो और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय में राष्ट्रीय प्रोफेसर भी रहे।  भारत सरकार ने उन्हें 2016 में पद्म श्री के नागरिक सम्मान से सम्मानित किया ।
प्रोफ़ेसर सिंह सादगी एवं ईमानदारी के पर्याय थे! पूरी करियर के दौरान उन्होंने निस्वार्थ भाव से रोगियों की सेवा की। हालांकि जिंदगी की अंतिम दौर में उन्हें लोगों ने अकेला छोड़ दिया।
किसी बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि मैने लाखों मरीजों की सेवा किया है ।कुछ लोगों को छोड़कर कोई हाल-चाल भी पूछने नहीं आता।
आज उनके निधन से आयुर्वेद चिकित्सा के ऋषि युग का अंत हो गया।

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Author: fastblitz24

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