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बांझपन के चलते पशुपालकों को होती है आर्थिक क्षति

ब्लॉक स्तर पर शिविर लगाकर पशुओं के रखरखाव की दी जा रही है जानकारी

संतुलित आहार नहीं मिलने से पशुओं में बांझपन की समस्या हो रही है। सभी इलाकों में यह समस्या देखने में आ रही है। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

बांझपन के हैं कई कारण

पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि पशुओं को संतुलित आहार, हरा चारा नहीं मिलने के कारण प्राय बछिया या पड़िया में जननांग का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है। यही कारण है कि बार-बार कृत्रिम गर्भाधान करने पर भी समय पर गर्भाधारण नहीं कर पाती है। इसके अलावा आंतरिक एवं बाह्य परजीवी से ग्रसित होने के कारण भी शारीरिक वृद्धि में विलंब होता है। रक्त की कमी के कारण भी पशुओं की गर्भधारण क्षमता प्रभावित होती है। कृत्रिम गर्भाधारण के लिए सही समय पर हीट की पहचान की जानकारी नहीं होने के कारण भी समस्या होती है। पशुपालकों को इस बारे में जागरूक किया जाना जरूरी है।

इस समस्या के निदान में पशु पालन विभाग जुट गया है। बांझपन के इलाज और जागरूकता के लिए राज्यभर में प्रति माह ब्लॉक स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं । पशु चिकित्सालयों और पशु सेवा केंद्रों की ओर से लगाई जा रहे इन शिविर शिविर में पहुंचे पशुओं की चिकित्सकीय जांच दवा और इलाज का बंदोबस्त तत्काल वही किया जाता है। इसके अतिरिक्त राज्य में नस्ल सुधार कार्यक्रम पहले से चल रहा है। इसी के तहत पशुओं में बांझपन की समस्या को भी दूर करने के उपाय किए जा रहे हैं।

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Author: fastblitz24

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