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हरियाली तीज पर 19 को बन रहे तीन शुभ संयोग

देहरादून। हरियाली तीज 19 अगस्त को धूमधाम से मनाई जाएगी। यह त्योहार नाग पंचमी से दो दिन पहले मनाया जाता है।

सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत महत्व का है। ज्योतिषाचार्य डॉ. सिधार दुबे के अनुसार, इस बार तीज खास इसलिए है कि इस दिन रवि, सिद्ध और साध्य योग का संयोग एक साथ है। सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 18 अगस्त रात 0801 मिनट से अगले दिन 19 अगस्त को रात 1019 मिनट पर समाप्त होगी। सुबह से लेकर रात 0919 मिनट तक सिद्ध योग है। इसके बाद साध्य योग अगले दिन सुबह तक रहेगा। रवि योग देर रात 0147 मिनट से 20 अगस्त को सुबह 0553 मिनट पर खत्म होगा। इसके अलावा इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है।

हर‌ियाली तीज का उत्सव श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह उत्सव महिलाओं का उत्सव है। सावन में जब सम्पूर्ण प्रकृति हरी ओढ़नी से आच्छादित होती है उस अवसर पर महिलाओं के मन मयूर नृत्य करने लगते हैं। वृक्ष की शाखाओं में झूले पड़ जाते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के रूप में मनाते हैं। सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत महत्व रखता है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों ओर हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं। इस अवसर पर महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और आनन्द मनाती हैं।

कहा जाता है कि इस दिन माता पार्वती सैकड़ों वर्षों की साधना के पश्चात् भगवान् शिव से मिली थीं। यह भी कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए १०७ बार जन्म लिया फिर भी माता को पति के रूप में शिव प्राप्त न हो सके। १०८ वीं बार माता पार्वती ने जब जन्म लिया तब श्रावण मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को भगवन शिव पति रूप में प्राप्त हो सके।तभी से इस व्रत का प्रारम्भ हुआ। इस अवसर पर जो सुहागन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके शिव -पार्वती की पूजा करती हैं उनका सुहाग लम्बी अवधि तक बना रहता है।साथ ही देवी पार्वती के कहने पर श‌िव जी ने आशीर्वाद द‌िया क‌ि जो भी कुंवारी कन्या इस व्रत को रखेगी और श‌िव पार्वती की पूजा करेगी उनके व‌िवाह में आने वाली बाधाएं दूर होंगी साथ ही योग्य वर की प्राप्त‌ि होगी। सुहागन स्‍त्र‌ियों को इस व्रत से सौभाग्य की प्राप्त‌ि होगी और लंबे समय तक पत‌ि के साथ वैवाह‌िक जीवन का सुख प्राप्त करेगी। इसल‌िए कुंवारी और सुहागन दोनों ही इस व्रत का रखती हैं।

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Author: fastblitz24

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